Friday, May 15, 2015

BOREDOM - ऊब






BOREDOM:

Oh my God! I get bored so much from this boring world that you made
Oh! what was the need to make me a thinker that you made
Only animals do not get bored neither do they get sad
Most humans too do not feel the boredom as they keep themselves fully engaged
In their daily chores or their household duties they keep stay glad
Few others are busy in raising themselves in the human race
But what do a man drinking spiritual Sprite do?
Has not Alexander, the great taught him that life is indeed a disgrace
It allows you not to take anything back with you
So, why waste time in earning praise
Dostoevsky's brothers Karamazov sought suicidal vase
The other way round which comes in my mind the very other minute
Is to live a life not as a "doer" but as an "observer"
As a "witness" watching the life 'to be or not to be'.........



क्या करूँ, बहुत ऊब जाता हूँ मैं: 

क्या करूँ, बहुत ऊब जाता हूँ मैं
तेरे बनाये इस जगत में कुछ भी रोचक नहीं पाता हूँ मैं
क्यूँकर बनाया तूने मुझे इतना चिंतनशील, इतना विचारशील मनुष्य
जानवरों की भाँती ज़िन्दगी बसर नहीं करना चाहता हूँ मैं
हैं कुछ हमसफ़र जो खुद को उलझाये रखते हैं दुनियादारी के काम-धंधों में
फिर कुछ ऐसे भी जो व्यस्त हैं नाम-धाम-पैसा कमाने में
पर मुझ जैसा आत्मिक प्यासा कैसे बुझाए अपनी चरम प्यास
कहते हैं वो की Sprite - बुझाए सिर्फ प्यास बाकी सब बकवास
पर फिर सिकंदर जाते जाते ये भी सीखा गए जाकर के खाली हाथ
की ना कुछ लाया और ना कुछ ले जाता हूँ मैं
दोस्तोवस्की के ब्रदर्स कर्माजोव तो आत्मघात की राह दिखला गए
पर उसमें एक कायर भगोड़ापन पाता हूँ मैं
इस घिनोने ख़याल के साथ ही एक रोशनाई की चमक भी दिखाई पड़ती है मुझे
धुंधली ही सही ये दर्शक दीर्घा
पर कुछ करने वाला "करता" बनने के बजाए अब बस एक "गवाह" बनकर जीना चाहता हूँ मैं
देख ना…सब तरफ घूमघामकर फिर अपने में ही समा जाता हूँ मैं  
  
Man is bad case....isn't it?

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