Wednesday, January 16, 2013

परियों की परीभाषा

परियों की परी भाषा :

प्रिय परी मृणाल पण्डे जी,

बहुत 'समय' बाद, आज आपके बदलते समाज को लेकर की गई दैनिक भास्करी अभिव्यक्ति में हमें फिर एक बार महज एक एकतरफा पक्ष देखने वाली एक स्त्री महसूस हुई। चूँकि ये'समय' को दोष देने की भयावह चुक आप जैसी एक संवेदनशील, जागरूक, नामचीन एवं सर्वगुण संपन्न लेखिका के मुखाग्र मनन से हुई है इसलिए हम अपनी अनचाही सोच एवं व्याकुल विचार आप तक फिर एक बार आप तक पहुंचाने के लिए विवश हो उठे हैं।

आशा है आप हमारी तत्पर सभ्यता को हमारी बर्बरता ना समझ हमारे प्रेम तल की गहराई को महसूस कर सकेंगी।

ये टिप्पणिया आपकी रूहानी नज़र के समक्ष प्रस्तुत हैं। कृपया गौर फरमाइएगा :

  1. जिसे आप स्त्रीयों के बीच उभरा नया आत्मविश्वास समझ रही हैं क्या वो वाकई में पवित्र आत्मविश्वास है या महज एक दिखावटी नाटकीयता? क्या वजह है की हम इसे पावन आत्मविश्वास ना मानते हुए अगर महत्वाकांक्षा का चिरस्थायी बीज मान बैठें? 
  2. आप जिसे आत्मगौरव मानकर गौरवान्वित हो उठी हैं, क्या वो केवल एक दूषित घमंड नहीं हो सकता? 
  3. अपना वर्चस्व साबित करने की ये कैसी अजब सी जिद है जो स्त्रीयों को स्त्री रूप, स्त्री सादगी, स्त्रैन चरित्र, स्त्रैन व्यक्तित्व छोड़ पुरुषार्थी बनने का मजबूर कर रही है?
  4. बाल कटा कर, जीन्स-t शर्ट, कशमकश फैलाते कसे हुए दुपट्टे रहित टॉप्स, वस्त्र, वेशभूषा, मिनी स्कर्ट, पहन-पहना कर आप और आजकल की युवतियाँ, औरतें, माताएँ-बहने अगर इतराती फिरें और वो भी इस बहुमुखी, रुढ़िवादी, संस्कारविहीन एवं परम्परागत भारतीय समाज में तो आप चाहती हैं की हम उसे आपकी इस युग की जरुरत माने बजाए उसे आपकी अंतर्मुखी सोच, आपकी मॉडर्न व्यावहारिकता, आपकी अमर्यादित संस्कारहीनता की अपाराम्पारिक गतन। क्यों?
  5. आप खुद की भी अपवित्र सोच बदलने के बजाए केवल पुरुषों को अपनी सोच बदलने का बेतुकी मांग कैसे कर सकती हैं?
  6. क्या आपको पूर्णतः ज्ञात है की उस दिल्ली की सर्द रात में bus में बलात्कार के ठीक पूर्व में ऐसी क्या अव्यवहारिक, असामाजिक, अमर्यादित घटना घटित हुई हो सकती है जिसने उन गटर के कीड़ों को ना केवल अमानवीय व्यवहार अपनाने के लिए मजबूर कर दिया अपितु अतुलनीय दानव, नर-पिशाच, हत्यारा भी बन्ने के लिए और उत्तेजित कर दिया?
  7. क्या आपने कभी उन 5 बलात्कारियों का पक्ष सुनने-जानने-समझने-बूझने की अद्वितीय पहल की?
  8.  क्या आप जानती हैं की 'दामिनी' या 'निर्भय' अंतिम साँस तक अपनी माता से किस बात के लिए माफ़ी मांगती रही?
  9. क्या आपको पता है लड़की के परिवार वालों को और खासतौर पर लड़की की माँ को उन पाँचों बर्बर व्यक्तियों का बयान सुनने के बाद कितना लज्जित होना पड़ा? इतना की वो लोग आगे कुछ सुन पाने की हालत में ही नहीं थे।
अब इन सवालों का लोकतांत्रिक जवाब निस्वार्थ भाव से स्वयं को देकर आप ही तय कीजिये की घटिया, अर्ध-नग्न, अर्ध-सत्य, भोथरी एवं स्वार्थपरक सोच किस किस की है और किसकी नहीं। अल्लाह आपकी मदद जरुर करेंगे। परमात्मा आपको आशीर्वाद जरुर देंगे। God will definitely bestow you with eternal harmony of love, peace, masculine-feminine power & bliss. प्रभजी का सिमरन बड़ा ही फलदायक होगा आपके एवेम जगत के कल्याण हेतु।

आमीन

 

Man is bad case....isnt it?

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